Hema Malini Stotram हेमा मालिनी स्तोत्रम्

Hema Malini Stotram हेमा मालिनी स्तोत्रम्

Author: Rajat Jain October 24, 2025 Duration: 7:22

।। हेमामालिनी स्तोत्रम् ।।


ध्यानं-

हेमवर्णां चतुर्बाहुं रत्नसिंहासनस्थिताम्।

पद्महस्ता वराभीति करां दन्तोल्लासितविग्रहम्।।


कौस्तुभाभरणोपेतां कीर्तिमालाविभूषिताम्।

त्रैलोक्यजननीं वन्दे हेममालिन्यरूपिणीम्।।


स्तोत्रं-

हेमवर्णे हेममाले हेमरत्नविभूषिते।

हेमसिंहासिनि त्वं वै हेमलक्ष्मि नमोऽस्तु ते।।१।।


सुवर्णशृङ्गारमयीं कनकद्युति भूषिताम्।

रत्नराजिविलसिनीं हेमलक्ष्मीं नमाम्यहम्।।२।।


हेमजटा जटाजूटे हेमकुण्डलमण्डिता।

हेमांगदे हेमनूपुरे हेमकेयूरमण्डिता।।३।।


हेमसारस्वती संयुक्ता हेमविष्णुपरायणा।

हेमपद्मासनारूढा हेमनादविनादिनी।।४।।


हेमवर्षाय च या नित्यं हेमकुबेरवन्दिता।

हेमसंकल्पसम्पन्ना हेमकान्तिसमुद्धिता।।५।।


हेमवर्णां शुभां देवीं रत्नमाल्यविभूषिताम्।

कमलासनसंस्थां च भजे हेममालिनीं हरिप्रयाम्।।६।।


सुवर्णसिंहासनस्थां स्वर्णकेयूरमण्डिताम्।

स्वर्णकान्तिं समुद्धोष्यं स्वर्णलक्ष्मीं नमाम्यहम्।।७।।


हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णाभरणोज्ज्वलाम्।

चतुर्भुजां महालक्ष्मीं जयन्तीं नम्रतां गतः।।८।।


हेममाल्यविलासिनीं रत्नसारविभूषिताम्।

वज्रकान्तिं प्रदायिन्यां नमामि तां सुरेश्वरीम्।।९।।


काञ्चनाभरणां देवीं चन्द्रकोटिसमप्रभाम्।

हिरण्मयीं श्रीं ह्रीं क्लीं लक्ष्मीं नमाम्यहं सदा।।१०।।


सर्वरत्ननिवासिन्यै सुवर्णस्रग्धरायै च।

कमलाक्ष्यै महाशक्त्यै लक्ष्म्यै सौम्यायै नमः।।११।।


स्वर्णसिन्धुतटायां या वसन्ति सदा सुरा।

सा लक्ष्मीः पद्मपुष्पस्था मां कुर्यात्सर्वसंपदा।।१२।।


हेमद्वीपविहारिण्यै काञ्चनदुर्गवासिनीम्।

कुलदेवीं जगन्मातर्मां पालय शुभप्रदे।।१३।।


हेमपुष्पैः समर्च्यां तां रत्नदीपैः सुसन्तुष्टाम्।

नानाफलप्रदां देवीं वन्दे हेममालिनीम्।।१४।।


हिरण्यकश्यपद्वेषीं विष्णुप्रियां महेश्वरीम्।

स्वर्णसंपत्प्रदां लक्ष्मीं नमामि भक्तवत्सलाम्।।१५।।


काञ्चनस्रग्धरां देवीं रत्नसिंहासनस्थिताम्।

वेदविद्यामयीं लक्ष्मीं नमामि सर्वसिद्धये।।१६।।


स्वर्णकीर्तिं प्रयच्छन्तीं स्वर्णरूपधरां शुभाम्।

स्वर्णलक्ष्मीं नमाम्यद्य सुवर्णेन समृद्धये।।१७।।


रत्नमालां च या धत्ते स्वर्णमालां च शोभनाम्।

सा लक्ष्मीर्मम सर्वार्थं साधयत्वप्रणम्यताम्।।१८।।


श्रीशक्तिं रत्नगर्भां च सुवर्णगात्रिनीं शुभाम्।

श्रीं ह्रीं बीजसमायुक्तां लक्ष्मीं वन्दे पुनः पुनः।।१९।।


स्वर्णराशिं करस्थां तां रत्नकुंभैः समन्विताम्।

ददातु मे हेमलक्ष्मीः सर्वकामफलप्रदाम्।।२०।।


हेमलता समुत्पन्ना कमलात्सहिते प्रभो।

त्वं मे लक्ष्मीः सदा तिष्ठ न गृहं मम शोभय।।२१।।


काञ्चनप्रभया युक्ता चन्द्रमण्डलमध्यगा।

सा लक्ष्मीर्मे गृहे नित्यं भासमानं कुरु प्रभो।।२२।।


स्वर्णपर्वतसङ्काशां स्वर्णतोरणमण्डिताम्।

स्वर्णकलशहस्तां तां वन्दे हेममयीं शुभाम्।।२३।।


स्वर्णरेखा समुद्भूतां ब्रह्मविद्याप्रकाशिनीम्।

लक्ष्मीं ब्रह्मस्वरूपां तां नमामि सिद्धिदायिनीम्।।२४।।


काञ्चनाङ्गीं वरांगीं च रत्नवेषविभूषिताम्।

हेममालिनी लक्ष्मीं च सर्वशक्तिस्वरूपिणीम्।।२५।।


श्रीं ह्रीं क्लीं हेममालिन्यै नमः कार्यसिद्धये।

जप्यं स्तोत्रं मया प्रोक्तं लक्ष्मीप्रीत्यै सदा पठेत्।।२६।।


।। इति श्री हेमा-मालिनी स्तोत्रं संपूर्णम् ।।




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Author: Language: Hindi Episodes: 50

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