ग्रहणकाल में भोजन करना वर्जित क्यों?

ग्रहणकाल में भोजन करना वर्जित क्यों?

Author: Nilesh Kumar Agarwal May 25, 2023 Duration: 1:51

हमारे ऋषि-मुनियों ने सूर्य और चंद्र ग्रहण लगने के समय भोजन करने के लिए मना किया है, क्योंकि उनकी मान्यता थी कि ग्रहण के दौरान खाद्य वस्तुओं, जल आदि में सूक्ष्म जीवाणु एकत्रित होकर दूषित कर देते हैं। इसलिए इनमें कुश डाल दिया जाता है, ताकि कीटाणु कुश में एकत्रित हो जाएं और उन्हें ग्रहण के बाद फेंका जा सके। शास्त्रों में कहा गया है कि ग्रहण के बाद स्नान करके पवित्र होने के पश्चात् ही भोजन करना चाहिए। ग्रहण के समय भोजन करने से सूक्ष्म कीटाणुओं के पेट में जाने से रोग होने की आशंका रहती है। इसी वजह से यह विधान बनाया गया है।


Hindu Reeti Riwaaz हिन्दू रीति रिवाज एक ऐसा श्रव्य-माध्यम है जो हिंदू धर्म की गहराई में छिपे उन वैज्ञानिक आधारों और सूक्ष्म तर्कों को समझने का प्रयास करता है, जिन पर हमारे दैनिक जीवन के संस्कार और रीति-रिवाज टिके हैं। नीलेश कुमार अग्रवाल के साथ यह पॉडकास्ट उन प्राचीन नियमों एवं सिद्धांतों की यात्रा पर ले जाता है, जिन्हें ऋषि-मुनियों ने मानव सभ्यता को सुसंस्कृत करने के लिए धर्म की पृष्ठभूमि पर रचा था। यहाँ केवल रस्मों का वर्णन नहीं, बल्कि उनके पीछे के आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक उद्देश्यों पर चर्चा होती है। शिशु के गर्भ में आने से लेकर जीवन के विभिन्न चरणों तक, हर संस्कार किस प्रकार आत्मा की मलिनता को हटाकर नए, श्रेष्ठ संस्कारों को आरोपित करने का माध्यम बनता है-इसकी सार्थक व्याख्या आपको इस श्रृंखला में मिलेगी। प्रत्येक प्रकरण हमारी संस्कृति के उस मूलभूत लक्ष्य को उजागर करता है: एक संस्कारवान, धार्मिक भाव से परिपूर्ण और आध्यात्मिक रूप से साकार मानव का निर्माण। यह शिक्षा का एक ऐसा कोर्स है जो पारंपरिक ज्ञान को स्पष्ट, प्रासंगिक भाषा में प्रस्तुत करता है, जिससे श्रोता इन रीतियों के महत्व को अपने आधुनिक जीवन के साथ जोड़ सकें।
Author: Language: Hindi Episodes: 12

Hindu Reeti Riwaaz हिन्दू रीति रिवाज
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