सीमंतोन्नयन संस्कार

सीमंतोन्नयन संस्कार

Author: Nilesh Kumar Agarwal June 13, 2023 Duration: 1:50
सीमंतोन्नयन संस्कार को छठे से आठवें माह के बीच किया जाता है। प्रचलित मान्यता के अनुसार इसे गर्भावस्था के आठवें माह में करना शुभ माना गया हैं। दरअसल इसे करने का शुभ समय तब होता हैं जब शिशु का ज्यादातर विकास हो चुका होता हैं तथा उसमे सोचने व समझने की क्षमता विकसित हो जाती है।

ऐसे समय में वह शिशु गर्भ में अपनी माँ के भावों, उसकी क्रियाओं, बातों इत्यादि को सुन सकता है तथा उन पर अपने भाव भी प्रकट कर सकता है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इस समय यदि आपका मन प्रसन्न है तो आपका शिशु भी प्रसन्

Hindu Reeti Riwaaz हिन्दू रीति रिवाज एक ऐसा श्रव्य-माध्यम है जो हिंदू धर्म की गहराई में छिपे उन वैज्ञानिक आधारों और सूक्ष्म तर्कों को समझने का प्रयास करता है, जिन पर हमारे दैनिक जीवन के संस्कार और रीति-रिवाज टिके हैं। नीलेश कुमार अग्रवाल के साथ यह पॉडकास्ट उन प्राचीन नियमों एवं सिद्धांतों की यात्रा पर ले जाता है, जिन्हें ऋषि-मुनियों ने मानव सभ्यता को सुसंस्कृत करने के लिए धर्म की पृष्ठभूमि पर रचा था। यहाँ केवल रस्मों का वर्णन नहीं, बल्कि उनके पीछे के आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक उद्देश्यों पर चर्चा होती है। शिशु के गर्भ में आने से लेकर जीवन के विभिन्न चरणों तक, हर संस्कार किस प्रकार आत्मा की मलिनता को हटाकर नए, श्रेष्ठ संस्कारों को आरोपित करने का माध्यम बनता है-इसकी सार्थक व्याख्या आपको इस श्रृंखला में मिलेगी। प्रत्येक प्रकरण हमारी संस्कृति के उस मूलभूत लक्ष्य को उजागर करता है: एक संस्कारवान, धार्मिक भाव से परिपूर्ण और आध्यात्मिक रूप से साकार मानव का निर्माण। यह शिक्षा का एक ऐसा कोर्स है जो पारंपरिक ज्ञान को स्पष्ट, प्रासंगिक भाषा में प्रस्तुत करता है, जिससे श्रोता इन रीतियों के महत्व को अपने आधुनिक जीवन के साथ जोड़ सकें।
Author: Language: Hindi Episodes: 12

Hindu Reeti Riwaaz हिन्दू रीति रिवाज
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पुंसवन संस्कार [not-audio_url] [/not-audio_url]

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पुंसवन संस्कार की विधि ओषधि अवघ्राणपुंसवन संस्कार के दौरान सबसे पहले एक विशेष प्रकार की औषधि गर्भवती महिला के नासिका छिद्र से उसके अंदर पहुँचाई जाती हैं। इस प्रक्रिया के दौरान गिलोय वृक्ष के तने से कुछ बूँदे निकालकर मंत्…
गर्भाधान संस्कार क्यों? [not-audio_url] [/not-audio_url]

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दांपत्य जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य है-श्रेष्ठ गुणों वाली, स्वस्थ, ओजस्वी, चरित्रवान और यशस्वी संतान प्राप्त करना । स्त्री-पुरुष की प्राकृतिक संरचना ही ऐसी है कि यदि उचित समय पर संभोग किया जाए, तो संतान होना स्वाभाविक ही ह…
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इस एपिसोड में हम जानेंगे की मनुष्य जीवन दुर्लभ क्यों है, और कैसे मनुष्य शरीर द्वारा ही मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है।
ग्रहणकाल में भोजन करना वर्जित क्यों? [not-audio_url] [/not-audio_url]

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हमारे ऋषि-मुनियों ने सूर्य और चंद्र ग्रहण लगने के समय भोजन करने के लिए मना किया है, क्योंकि उनकी मान्यता थी कि ग्रहण के दौरान खाद्य वस्तुओं, जल आदि में सूक्ष्म जीवाणु एकत्रित होकर दूषित कर देते हैं। इसलिए इनमें कुश डाल द…
गंगा विशेष पवित्र नदी क्यों? [not-audio_url] [/not-audio_url]

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महाभारत में कहा गया है-यद्यकार्यशतम् कृत्वाकृतम् गंगाभिषेचनम् । सर्व तत् तस्य गंगाभ्भो दहत्यग्निरिवेन्धनम् ॥ सर्व कृतयुगे पुण्यम त्रेतायां पुष्करं स्मृतम् । द्वापरेऽपि कुरुक्षेत्रं गंगा कलियुगे स्मृता ॥ पुनाति कर्तिता पा…
हनुमानजी को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा क्यों? [not-audio_url] [/not-audio_url]

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