Ganesh Stuti by Nazeer Akbarabadi गणेश स्तुति (नज़ीर अकबराबादी)

Ganesh Stuti by Nazeer Akbarabadi गणेश स्तुति (नज़ीर अकबराबादी)

Author: Rajat Jain July 25, 2024 Duration: 11:28
Ganesh Stuti by Nazeer Akbarabadi नज़ीर अकबराबादी: गणेश जी की स्तुति ★ अव्वल तो दिल में कीजिए पूजन गनेश जी। स्तुति भी फिर बखानिए धन-धन गनेश जी। भक्तों को अपने देते हैं दर्शन गनेश जी। वरदान बख़्शते हैं जो देवन गनेश जी। हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी। देवेंगे रिद्धि सिद्धि औ' अन-धन गनेश जी॥1॥ माथे पै अर्द्ध चन्द्र की शोभा, मैं क्या कहूं। उपमा नहीं बने है मैं चुपका ही हो रहूं। उस छवि को देख देख के आनन्द सुख लहूं। लैलो निहार दिल में सदा अपने वो जपूं। हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी। देवेंगे रिद्धि सिद्धि औ' अन-धन गनेश जी॥2॥ इक दन्त को जो देखा किया खू़ब है बहार। इस पै हज़ार चन्द की शोभा को डालूँ वार। इनके गुणानुवाद का है कुछ नहीं शुमार। हर वक्त दिल में आता है अपने यही विचार। हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी। देवेंगे रिद्धि सिद्धि औ' अन-धन गनेश जी॥3॥ गजमुख को देख होता है सुख उर में आन-आन। दिल शाद-शाद होता है मैं क्या करूं बखान। इल्मो हुनर में एक हैं और बुद्धि के निधान। सब काम छोड़ प्यारे रख मन में यही आन। हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी। देवेंगे रिद्धि सिद्धि औ' अन-धन गनेश जी॥4॥ क्या छोटे-छोटे हाथ हैं चारों भले-भले। चारों में चार हैं जो पदारथ खरे-खरे। देते हैं अपने दासों को जो हैं बड़े-बड़ेI अलबत्ता अपनी मेहर यह सब पर करें-करें। हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी। देवेंगे रिद्धि सिद्धि औ' अन-धन गनेश जी॥5॥ इक दस्त में तो हैगा यह सुमिरन बहार दार? और दूसरे में फर्सी अजब क्या है उसकी धार? तीजे में कंज चौथे कर में हैं लिए अहार? मत सोच दिल में और तू ऐ यार बार-बार॥ हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी। देवेंगे रिद्धि सिद्धि औ' अन-धन गनेश जी॥6॥ अच्छे विशाल नैन हैं और तोंद है बड़ी। हाथों को जोड़ सरस्वती हैं सामने खड़ी॥ होवे असान पल में ही मुश्किल है जो अड़ी। फल पावने की इनसे तो है भी यही घड़ी॥ हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी। देवेंगे रिद्धि सिद्धि औ' अन-धन गनेश जी॥7॥ मूसा सवारी को है अजब ख़ूब बेनजीर। क्या खूब कान पंजे हैं और दुम है दिल पजीर॥ खाते हैं मोती चूर कि चंचल बड़ा शरीर। दुख दर्द को हरे हैं तो दिल को बधावें धीर॥ हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी। देवेंगे रिद्धि सिद्धि औ' अन-धन गनेश जी॥8॥ घी में मिला के कोई जो चढ़ाता है आ सिन्दूर। सब पाप उसके डालता कर दम के बीच चूर॥ फूल और विरंच शीश पै दीपक को रख कपूर। जो मन में होवे इच्छा तो फिर क्या है उससे दूर॥ हर आन ध्यान औ' सुमिरन गनेश जी। देवेंगे रिद्धि सिद्धि और अन-धन गनेश जी॥9॥ जुन्नार है गले में एक नाग जो काला। फूलों के हार डहडहे और मोती की माला॥ वह हैंगे अजब आन से शिव गौरी के लाला। सुर नर मुनि भी कहते हैं वो दीन दयाला॥ हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी। देवेंगे रिद्धि सिद्धि औ' अन-धन गनेश जी॥10॥ सनकादि सूर्य चन्द्र खड़े आरती करें। और शेषनाग गंध की ले धूप को धरें॥ नारद बजावें बीन चँवर इन्द्र ले ढरें। चारों बदन से स्तुति ब्रह्मा जी उच्चरें॥ हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी। देवेंगे रिद्धि सिद्धि औ' अन-धन गनेश जी॥11। जंगम अतीत जोगी जती ध्यान लगावें। सुर नर मुनीश सिद्ध सदा सिद्धि को पावें॥ और संत सुजन चरन की रज शीश चढ़ावें। वेदों पुरान ग्रंथ जो गुन गाय सुनावें॥ हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी। देवेंगे रिद्धि सिद्धि औ' अन-धन गनेश जी॥12॥ जो जो शरन में आया है कीन्हा उसे सनाथ। भव सिन्धु से उतारा है दम में पकड़ के हाथ। यह दिल में ठान अपने और छोड़ सबका साथ। तू भी ‘नज़ीर’ चरणों में अपना झुका के माथ। हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी। देवेंगे रिद्धि सिद्धि औ' अन-धन गनेश जी॥13॥ हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी। देवेंगे रिद्धि सिद्धि औ' अन-धन गनेश जी॥ ★ - नज़ीर अकबराबादी

Rajat Jain एक ऐसा मंच है जहाँ प्राचीन जैन और हिंदू मंत्रों एवं प्रार्थनाओं का सस्वर पाठ सुनने को मिलता है। यह पॉडकास्ट दैनिक जीवन में आध्यात्मिक शांति और ध्यान के लिए एक सरल रास्ता प्रस्तुत करता है। प्रत्येक एपिसोड में विभिन्न मंत्रों, स्तोत्रों और भजनों की स्पष्ट और भावपूर्ण रिकॉर्डिंग शामिल होती है, जिन्हें सुनकर श्रोता स्वयं को एक शांत और केंद्रित स्थान पर पाते हैं। यह केवल एक रिकॉर्डिंग नहीं, बल्कि एक साझा अनुभव है जहाँ शब्दों की पवित्र ध्वनि मन को शांत करती है और आत्मा को स्पर्श करती है। रजत जैन की आवाज़ में इन प्रार्थनाओं को सुनना एक गहन आंतरिक अनुभव बन जाता है, चाहे आप इसे सुबह की शुरुआत में सुनें या दिनभर की व्यस्तता के बाद विश्राम के क्षणों में। इस पॉडकास्ट का उद्देश्य इन पवित्र ध्वनियों को सभी तक पहुँचाना है, ताकि हर कोई अपनी गति से, बिना किसी जटिलता के, इनके लाभ प्राप्त कर सके। यह आध्यात्मिक अभ्यास का एक सुलभ और नियमित स्रोत है।
Author: Language: Hindi Episodes: 50

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Mantratmakam Shri Maruti Stotram मंत्रात्मकम् श्री मारुति स्तोत्रम् ★ यह एक मंत्र गर्भित स्तोत्र है जिसका अर्थ है कि इस स्तोत्र की प्रत्येक पंक्ति मंत्र के एक अक्षर से शुरू होती है। यदि हम इस स्तोत्र की प्रत्येक पंक्ति क…
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Rinmochan Maha Ganpati Stotra ऋणमोचन महागणपति स्तोत्र [not-audio_url] [/not-audio_url]

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Rinmochan Maha Ganpati Stotra ऋणमोचन महागणपति स्तोत्र ◆ विनियोग – ॐ अस्य श्रीऋण-मोचन महा-गणपति-स्तोत्र-मन्त्रस्य भगवान् शुक्राचार्य ऋषिः, ऋण-मोचन-गणपतिः देवता, मम-ऋण-मोचनार्थं जपे विनियोगः। ॐ स्मरामि देवदेवेशं वक्रतुण्डं…
Devshayani Ekadashi (Hari Shayan) Mantra देवशयनी एकादशी (हरि शयन) मंत्र [not-audio_url] [/not-audio_url]

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