Hanumat Kavacham हनुमत् कवचम्

Hanumat Kavacham हनुमत् कवचम्

Author: Rajat Jain February 24, 2026 Duration: 6:06

श्रीमदानन्दरामायणान्तर्गत श्रीहनुमत्कवचं!! ✓


ॐ श्री हनुमते नमः ॥

ॐ अस्य श्रीहनुमत्कवच स्तोत्र महामन्त्रस्य,

श्रीरामचन्द्र ऋषिः । श्रीहनुमान् परमात्मा देवता ।

अनुष्टुप् छन्दः। मारुतात्मजेति बीजंअञ्जनीसूनुरिति शक्तिः। लक्ष्मणप्राणदातेति कीलकं ।

रामदूतायेत्यस्त्रं । हनुमान् देवता इति कवचं ।

पिङ्गाक्षोमित विक्रम इति मन्त्रः।श्रीरामचन्द्र प्रेरणया रामचन्द्र प्रीत्यर्थंमम सकल कामना सिद्ध्यर्थं जपे विनियोगः ॥


करन्यासः

ॐ ह्रां अञ्जनीसुताय अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।

ॐ ह्रीं रुद्र मूर्तये तर्जनीभ्यां नमः ।

ॐ ह्रूं रामदूताय मध्यमाभ्यां नमः ।

ॐ ह्रैं वायुपुत्राय अनामिकाभ्यां नमः ।

ॐ ह्रौं अग्निगर्भाय कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।

ॐ ह्रः ब्रह्मास्त्र निवारणाय करतल करपृष्ठाभ्यां नमः।

अङ्गन्यासः ॥

ॐ ह्रां अञ्जनीसुताय हृदयाय नमः ।

ॐ ह्रीं रुद्र मूर्तये शिरसे स्वाहा ।

ॐ ह्रूं रामदूताय शिकायै वषट् ।

ॐ ह्रैं वायुपुत्राय कवचाय हुं ।

ॐ ह्रौं अग्निगर्भाय नत्रत्रयाय वौषट् ।

ॐ ह्रः ब्रह्मास्त्र निवारणाय अस्त्राय फट् ।

भूर्भुवःसुवरोमिति दिग्बन्धः।


अथ ध्यानम् ॥

ध्यायेत्बालदिवाकर द्युतिनिभं देवारिदर्पापहं

देवेन्द्र प्रमुखं प्रशस्त यशसं देदीप्यमानं रुचा ।

सुग्रीवादि समस्तवानरयुतं सुव्यक्त तत्त्वप्रियं

संसक्तारुण लोचनं पवनजं पीताम्बरालङ्कृतं ॥ १॥


उद्यन् मार्ताण्डकोटि प्रकट रुचियुतं चारुवीरासनस्थं

मौञ्जी यज्ञोपवीताभरण रुचिशिखं शोभितं कुण्डलाङ्गं ।

भक्तानामिष्टदं तं प्रणतमुनिजनं वेदनाद प्रमोदं

ध्यायेदेवं विधेयं प्लवग कुलपतिं गोष्पदीभूत वार्धिं ॥ २॥


वज्राङ्गं पिङ्गकेशाढ्यं स्वर्णकुण्डल मण्डितं

निगूढमुपसङ्गम्य पारावार पराक्रमं ॥ ३॥


स्फटिकाभं स्वर्णकान्तिं द्विभुजं च कृताञ्जलिं ।

कुण्डल द्वय संशोभिमुखांभोजं हरिं भजे ॥ ४॥


सव्यहस्ते गदायुक्तं वामहस्ते कमण्डलुं ।

उद्यद् दक्षिण दोर्दण्डं हनुमन्तं विचिन्तयेत् ॥ ५॥


अथ मन्त्रः ॥

ॐ नमो हनुमते शोभिताननाय यशोलङ्कृताय

अञ्जनीगर्भ संभूताय। राम लक्ष्मणानन्दकाय।

कपिसैन्य प्रकाशन पर्वतोत्पाटनाय।

सुग्रीवसाह्यकरण परोच्चाटन। कुमार ब्रह्मचर्य।

गंभीर शब्दोदय।ॐ ह्रीं सर्वदुष्टग्रह निवारणाय स्वाहा।


ॐ नमो हनुमते एहि एहि।सर्वग्रह भूतानां शाकिनी डाकिनीनां विशमदुष्टानां सर्वेषामाकर्षयाकर्षय ।

मर्दय मर्दय । छेदय छेदय । मर्त्यान् मारय मारय ।

शोषय शोषय। प्रज्वल प्रज्वल।भूतमण्डल पिशाचमण्डल निरसनाय। भूतज्वर प्रेतज्वर चातुर्थिकज्वर ब्रह्मराक्षस पिशाचः छेदनः क्रिया विष्णुज्वर। महेशज्वरं छिन्धि छिन्धि। भिन्धि भिन्धि । अक्षिशूले शिरोभ्यन्तरे ह्यक्षिशूले गुल्मशूले

पित्तशूले ब्रह्म राक्षसकुल प्रबल नागकुलविष निर्विषझटितिझटिति । ॐ ह्रीं फट् घेकेस्वाहा ।


ॐ नमो हनुमते पवनपुत्र वैश्वानरमुख पापदृष्टि शोदा दृष्टि हनुमते घो अज्ञापुरे स्वाहा ।स्वगृहे द्वारे पट्टके तिष्डतिष्ठेति तत्र रोगभयं राजकुलभयं नास्ति ।

तस्योच्चारण मात्रेण सर्वे ज्वरा नश्यन्ति ।

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं फट् घेघेस्वाहा ।


श्री रामचन्द्र उवाच-

हनुमान् पूर्वतः पातु दक्षिणे पवनात्मजः ।

अधस्तु विष्णु भक्तस्तु पातु मध्यं च पावनिः ॥ १॥

लङ्का विदाहकः पातु सर्वापद्भ्यो निरन्तरं ।

सुग्रीव सचिव: पातु मस्तकं वायुनन्दनः ॥ २॥

भालं पातु महावीरो भृवोर्मध्ये निरन्तरं ।

नेत्रे छायापहारी च पातु नः प्लवगेश्वरः ॥ ३॥

कपोले कर्णमूले च पातु श्रीरामकिङ्करः ।

नासाग्रं अञ्जनीसूनुः पातु वक्त्रं हरीश्वरः ॥ ४॥

वाचं रुद्रप्रियः पातु जिह्वां पिङ्गल लोचनः ।

पातु देवः फाल्गुनेष्टः चिबुकं दैत्यदर्पहा ॥ ५॥

पातु कण्ठं च दैत्यारिः स्कन्धौ पातु सुरार्चितः ।

भुजौ पातु महातेजाः करौ च चरणायुधः ॥ ६॥

नगरन् नखायुधः पातु कुक्षौ पातु कपीश्वरः ।

वक्षो मुद्रापहारी च पातु पार्श्वे भुजायुधः ॥ ७॥

लङ्का निभञ्जनः पातु पृष्ठदेशे निरन्तरं ।

नाभिं च रामदूतस्तु कटिं पात्वनिलात्मजः ॥ ८॥

गुह्यं पातु महाप्राज्ञो लिङ्गं पातु शिवप्रियः ।

ऊरू च जानुनी पातु लङ्काप्रसाद भञ्जनः ॥ ९॥

जङ्घे पातु कपिश्रेष्ठोः गुल्फौ पातु महाबलः ।

अचलोद्धारकः पातु पादौ भास्कर सन्निभः ॥ १०॥

अङ्गान्यमित सत्वाढ्यः पातु पादरङ्गुलीस्तथा ।

सर्वाङ्गानि महाशूरः पातु रोमाणि चाक्मवित् ॥ ११॥

हनुमत् कवचं यस्तु पठेद् विद्वान् विचक्षणः ।

स एव पुरुषश्रेष्ठो भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ॥ १२॥

त्रिकालमेककालं वा पठेन् मासत्रयं नरः ।

सर्वान् रिपून् क्षणान् जित्वा स पुमान् श्रियमाप्नुयात् ॥ १३॥


इति श्रीशतकोटि रामचरितांतर्गत श्रीमदानन्दरामायणे वाल्मिकीये मनोहरकाण्डे श्रीहनुमत्कवचं सम्पूर्णं॥



Rajat Jain एक ऐसा मंच है जहाँ प्राचीन जैन और हिंदू मंत्रों एवं प्रार्थनाओं का सस्वर पाठ सुनने को मिलता है। यह पॉडकास्ट दैनिक जीवन में आध्यात्मिक शांति और ध्यान के लिए एक सरल रास्ता प्रस्तुत करता है। प्रत्येक एपिसोड में विभिन्न मंत्रों, स्तोत्रों और भजनों की स्पष्ट और भावपूर्ण रिकॉर्डिंग शामिल होती है, जिन्हें सुनकर श्रोता स्वयं को एक शांत और केंद्रित स्थान पर पाते हैं। यह केवल एक रिकॉर्डिंग नहीं, बल्कि एक साझा अनुभव है जहाँ शब्दों की पवित्र ध्वनि मन को शांत करती है और आत्मा को स्पर्श करती है। रजत जैन की आवाज़ में इन प्रार्थनाओं को सुनना एक गहन आंतरिक अनुभव बन जाता है, चाहे आप इसे सुबह की शुरुआत में सुनें या दिनभर की व्यस्तता के बाद विश्राम के क्षणों में। इस पॉडकास्ट का उद्देश्य इन पवित्र ध्वनियों को सभी तक पहुँचाना है, ताकि हर कोई अपनी गति से, बिना किसी जटिलता के, इनके लाभ प्राप्त कर सके। यह आध्यात्मिक अभ्यास का एक सुलभ और नियमित स्रोत है।
Author: Language: Hindi Episodes: 50

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