Sri Parvathi Shakthi Tandav Stuti श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति

Sri Parvathi Shakthi Tandav Stuti श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति

Author: Rajat Jain June 8, 2026 Duration: 6:51

श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति


कुचेल-केश-पाश-बद्ध-मल्लिका-सुगन्धिनी, उमेश-वाम-भाग-नित्य-केलि-कंज-धारिणी। अशोक-पुष्प-पल्लवैः सु-रञ्जित-स्व-मूर्धनी, करोतु शक्ति-ताण्डवं सदा शिवा भवानी ॥1॥


ललाट-बिन्दु-सिन्धु-रक्त रञ्जिता स्व-भालका, धनुर्धरा त्रिशूलिनी कपाल-पाश-धारिणी। कराल-काल-मर्दिनी समस्त-दुःख-हारिणी, नमामि शैल-पुत्रिणीं सदा शिवा भवानी ॥2॥


रणत्-क्वणत्-कणत्-किङ्किणी-नूपुर-घोष-मण्डिता, चलत्-चलत्-पद-क्रमैः सु-विश्व-चक्र-चालिनी। अघोर-रूप-धारिणी घोर-शत्रु-घातिनी, प्रचण्ड-शक्ति-रूपिणी सदा शिवा भवानी ॥3॥


जगज्जननी पावनी प्रसन्न मन्द-हासिनी, सु-भक्त-वृन्द-वन्दिता समस्त-विघ्न-नाशिनी। प्रलय-वह्नि-रञ्जिता महानिभय-दायिनी, जयतु जयतु पार्वती सदा शिवा भवानी ॥4॥


जटा-कटाह-संभ्रम-भ्रमन्-निलिम्पनिर्झरी, विलोम-शक्ति-रूपिणी कराल-खड्ङ्ग-धारिणी। धगद् धगद् धगज्-ज्वलत्-ललाट-पट्ट-पावके, किशोर-चन्द्र-शेखरे रतिं प्रतिक्षणं मम ॥5॥


महा-विचित्र-नृत्त-नाद-डम्ब-डम्ब डम्बिका,

प्रचण्ड-मुण्ड-मण्डली-गले-विराज-मालिका।

दश-दिगन्त-गामिनी सु-तेज-पुञ्ज-भासिनी,

पुनातु माँ सदा-सदा उमा-महेश्वरी विभू ॥6॥


नितम्ब-चन्द्र-कान्ति-कान्त मेखला-सु-शोभिनी,

कराल-दंष्ट्र-भास्वरा सु-जिह्व-रक्त-रञ्जिता।

महिष-दैत्य-मर्दिनी सुरेन्द्र-दुःख-भञ्जिनी,

जयतु शैल-नन्दिनी शिवा-शवा-विहारिणी ॥7॥


नवाक्षर-मन्त्र-मयी त्रिनेत्र-तेज-दायिनी, कुलाकुल-स्वरूपिणी महा-विपत्ति-हारिणी। समस्त-सिद्ध-योगिनी गणेश्वर-प्रमोदिनी, भजामि दिव्य-पार्वतीं शिव-प्रिया-मनोहराम् ॥৪॥


प्रफुल्ल-नील-पङ्कज-प्रपञ्च-कालिम-प्रभा-वलम्बि-कण्ठ-कन्दली-रुचि प्रबद्ध कन्धरम्। स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं गजाम्विका-वृषध्वजं नमामि शम्भु-सुन्दरीम् ॥9॥


क्वचिद्-दिगम्बरी-छटा-विचित्र-रूप-धारिणी, क्वचिद्-मृणाल-कोमला सु-पुष्प-हार-धारिणी। क्वचिद्-महा-भयङ्करा कराल-काल-रूपिणी, नमामि तां जगन्मयीं शिवा-सखीं सु-पावनीम् ॥10॥


रणत् मृदङ्ग शङ्ख नाद घोर श ब्द मण्डिता, चलत् कपाल कुण्डला फणा मणि विभूषिता। धनु र्विमुक्त सायकैः सुरारि सैन्य दारिणी, प्रचण्ड चण्ड नन्दिनीं नमामि दैत्य हारिणीम् ॥11॥


नृमुण्ड माल मण्डिता विशीर्ण केस पाशिका, कराल लोल जिह्विका त्रिलोक त्रास नाशिनी। महा कपाल पात्र गा सु रक्त पान कारिणी, जयत्य मेघ सुन्दरी महा धमाधम ध्वनिः ।॥12॥


समस्त शक्ति चक्र गा सु बिन्दु मध्य वासिनी, षडब्ज भेदिनी मुदा महा सुषुम्न वाहिनी। महा प्रकाश पुञ्जिका शिव स्वरुप कारिणी, मनस्विनि नमोऽस्तुते प्रपन्न भक्त तारिणी ॥13॥


अखण्ड शक्ति मण्डले सदैव काल कालिनी, विचित्र सृष्टि कारिणी सदा सु मङ्गल प्रदा। इदं हि नित्य मेव मुक्त मुत्तमोत्तमं स्तवं, पठन् स्मरन् ब्रुवन् नरो विशुद्धिमेति संततम् ॥14॥


नमस्ते नमस्ते महा शक्ति रूपे, नमस्ते नमस्ते शिवे शान्त रूपे। नमस्ते नमस्ते जगद् व्याप्त देहे, नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते ॥15॥


Rajat Jain एक ऐसा मंच है जहाँ प्राचीन जैन और हिंदू मंत्रों एवं प्रार्थनाओं का सस्वर पाठ सुनने को मिलता है। यह पॉडकास्ट दैनिक जीवन में आध्यात्मिक शांति और ध्यान के लिए एक सरल रास्ता प्रस्तुत करता है। प्रत्येक एपिसोड में विभिन्न मंत्रों, स्तोत्रों और भजनों की स्पष्ट और भावपूर्ण रिकॉर्डिंग शामिल होती है, जिन्हें सुनकर श्रोता स्वयं को एक शांत और केंद्रित स्थान पर पाते हैं। यह केवल एक रिकॉर्डिंग नहीं, बल्कि एक साझा अनुभव है जहाँ शब्दों की पवित्र ध्वनि मन को शांत करती है और आत्मा को स्पर्श करती है। रजत जैन की आवाज़ में इन प्रार्थनाओं को सुनना एक गहन आंतरिक अनुभव बन जाता है, चाहे आप इसे सुबह की शुरुआत में सुनें या दिनभर की व्यस्तता के बाद विश्राम के क्षणों में। इस पॉडकास्ट का उद्देश्य इन पवित्र ध्वनियों को सभी तक पहुँचाना है, ताकि हर कोई अपनी गति से, बिना किसी जटिलता के, इनके लाभ प्राप्त कर सके। यह आध्यात्मिक अभ्यास का एक सुलभ और नियमित स्रोत है।
Author: Language: Hindi Episodes: 50

Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers
Podcast Episodes
Tikkhuton Ka Paath (Guru Vandan) तिक्खुतों का पाठ (गुरु वंदन) [not-audio_url] [/not-audio_url]

Duration: 6:30
Tikkhuton Ka Paath (Guru Vandan) तिक्खुतों का पाठ (गुरु वंदन) • जब कभी हम संत मुनिराज के पास जाते हैं अथवा मुनिराज हमारे सामने आते दिखते हैं तो हम तिक्खुतों का पाठ का उच्चारण कर वंदन करते हैं। तिक्खुतों के उच्चारण के साथ…
Krishnam Vande Jagadgurum (Geeta) कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् (गीता) [not-audio_url] [/not-audio_url]

Duration: 6:00
Krishnam Vande Jagadgurum (Geeta) कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् (गीता) ★ पराकृतनमद्बन्धं परं ब्रह्म नराकृति। सौन्दर्यसारसर्वस्वं वन्दे नन्दात्मजं महः ।।१।। प्रपन्नपारिजाताय तोत्रवेत्रकपाणये। ज्ञानमुद्राय कृष्णाय गीतामृतदुहे नम…
Shri Guru Stotram श्री गुरु स्तोत्रम् [not-audio_url] [/not-audio_url]

Duration: 6:04
Shri Guru Stotram श्री गुरु स्तोत्रम् ★ || श्री महादेव्युवाच || गुरुर्मन्त्रस्य देवस्य धर्मस्य तस्य एव वा | विशेषस्तु महादेव ! तद् वदस्व दयानिधे || श्री महादेवी (पार्वती) ने कहा : हे दयानिधि शंभु ! गुरुमंत्र के देवता अर्…
Shri Guru Stuti श्री गुरु स्तुति [not-audio_url] [/not-audio_url]

Duration: 3:36
Shri Guru Stuti श्री गुरु स्तुति ◆ गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुर्गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुरेव परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥१॥ अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम् । तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥२॥ अज्ञानतिमिर…
Mantratmakam Shri Maruti Stotram मंत्रात्मकम् श्री मारुति स्तोत्रम् [not-audio_url] [/not-audio_url]

Duration: 4:08
Mantratmakam Shri Maruti Stotram मंत्रात्मकम् श्री मारुति स्तोत्रम् ★ यह एक मंत्र गर्भित स्तोत्र है जिसका अर्थ है कि इस स्तोत्र की प्रत्येक पंक्ति मंत्र के एक अक्षर से शुरू होती है। यदि हम इस स्तोत्र की प्रत्येक पंक्ति क…
Lakshmi Gayatri Mantra लक्ष्मी गायत्री मंत्र 3 times [not-audio_url] [/not-audio_url]

Duration: 1:59
Lakshmi Gayatri Mantra लक्ष्मी गायत्री मंत्र: ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥ घर परिवार में सुख व समृद्धि के लिए मां लक्ष्मी का यह लक्ष्मी गायत्री मंत्र भी काफी उपयुक्त है…
Jin Namaskarashtak Stotra जिन नमस्काराष्टक स्तोत्र [not-audio_url] [/not-audio_url]

Duration: 5:14
Jin Namaskarashtak Stotra जिन नमस्काराष्टक स्तोत्र ★ तुभ्यं नमः सकल लोकहितंकराय, तुभ्यं नमः सकल कर्म विनाशकाय । तुभ्यं नमः सकल जीवसुतारकाय, तुभ्यं नमो जिन वरेन्द्रसुखांकिताय ॥ तुभ्यं नमः सकल दोष विवर्जिताय, तुभ्यं नमः सक…
Rinmochan Maha Ganpati Stotra ऋणमोचन महागणपति स्तोत्र [not-audio_url] [/not-audio_url]

Duration: 5:57
Rinmochan Maha Ganpati Stotra ऋणमोचन महागणपति स्तोत्र ◆ विनियोग – ॐ अस्य श्रीऋण-मोचन महा-गणपति-स्तोत्र-मन्त्रस्य भगवान् शुक्राचार्य ऋषिः, ऋण-मोचन-गणपतिः देवता, मम-ऋण-मोचनार्थं जपे विनियोगः। ॐ स्मरामि देवदेवेशं वक्रतुण्डं…
Devshayani Ekadashi (Hari Shayan) Mantra देवशयनी एकादशी (हरि शयन) मंत्र [not-audio_url] [/not-audio_url]

Duration: 3:45
Devshayani Ekadashi (Hari Shayan) Mantra देवशयनी एकादशी (हरि शयन) मंत्र • आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी या हरिशयनी एकादशी कहते हैं। भगवान श्रीहरि विष्णु प्रकृति के पालनकर्ता हैं और उन्हीं कृपा से यह सृष्टि चल रही…